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झारखंड

रांची : कोरोना से कराहते हिंदपीढी में थूकने की फ़र्ज़ी खबरें पड़ी भारी, अब मीडिया का विरोध शुरू

Raghib Asim
15 April 2020 2:23 PM GMT
रांची : कोरोना से कराहते हिंदपीढी में थूकने की फ़र्ज़ी खबरें पड़ी भारी, अब मीडिया का विरोध शुरू
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तीन दिन पहले कुछ स्थानीय अखबारों ने यह खबर छापी की नगर निगम के सफाई कर्मियों पर लोग थूक रहे हैं. अखबारों में छपी इस खबर के बाद झारखंड के डीजीपी एमवी राव ने कहा कि जिस शख्स पर थूका गया है या जिसे थूके हुए नोट दिए गए हैं वह सामने आकर प्राथमिकी दर्ज कराए, हम कार्रवाई करेंगे...

रांची से राहुल सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। रांची शहर के बीचों बीच बसा हिंदपीढी इलाका इन दिनों सिर्फ कोरोना हाॅटस्पाॅट बने होने की वजह से ही नहीं बल्कि इससे जुड़ी कई और वजहों से भी चर्चा में है. झारखंड के अबतक ज्ञात कोरोना केस 27 में लगभग आधे 13 मामले इसी इलाके में मिले हैं. 31 मार्च को हिंदपीढी में ही झारखंड की पहली कोरोना मरीज के रूप में यहां रह रही मलेशियाई महिला को चिह्नित किया गया जो दिल्ली के निजामुद्दीन के तबलीगी जमात के आयोजन में शामिल होने के बाद धर्म प्रचार के लिए यहां आयी थी. वह कई विदेशी पुरुषों व महिलाओं के साथ रह रही थी, जिनके खिलाफ नियमों के उल्लंघन का मामला भी दर्ज किया गया है.

सके बाद इस इलाके में एक के बाद एक कई कोरोना मरीज मिले हैं. इन 15 दिनों में इस इलाके ने कोरोना संक्रमण के साथ कई और दर्द को भी झेला है. हिंदपीढी घनी आबादी वाला इलाका है जिसके इर्द-गिर्द शहर के मुख्य बाजार व अन्य दूसरे संस्थान हैं. यहां मुसलिम, हिंदू सहित दूसरे समुदाय के लोग रहते हैं. हल्के-फुल्के तनाव के बावजूद इलाके में लोग हमेशा से साथ रहते आए हैं. पर, इनकी बीमारी व पीड़ा को रिपोर्ट करने के मीडिया के अंदाज से स्थानीय लोगों में गुस्सा है. ऐसे में लोगों ने गोदी मीडिया हाय-हाय लिखकर बैनर टांग कर अपना विरोध जताया है. लोगों ने मेन रोड स्थित एकरा मसजिद से हिंदपीढी जाने वाले मार्ग पर बैनर लगाया है. इस बैनर में लिखा है कि गोदी मीडिया हाय-हाय, हिंदपीढी नो इंट्री, न्यूज अखबार बहिष्कार.

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तीन दिन पहले कुछ स्थानीय अखबारों ने यह खबर छापी की नगर निगम के सफाई कर्मियों पर लोग थूक रहे हैं और उन्हें थूक लगा हुआ नोट थमा रहे हैं, जिससे वे इलाके में संक्रमण के डर से जाने से इनकार कर रहे हैं. अखबारों में छपी इस खबर के बाद झारखंड के डीजीपी एमवी राव ने कहा कि जिस शख्स पर थूका गया है या जिसे थूके हुए नोट दिए गए हैं वह सामने आकर प्राथमिकी दर्ज कराए, हम कार्रवाई करेंगे. उन्होंने मीडिया कर्मियों द्वारा इस संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा था कि जिस पर थूका गया था उस शख्स की आपने पहचान की है तो उसे सामने लाइए हम जांच वहीं से शुरू करेंगे. डीजीपी ने कहा था अगर कोई यह कह रहा है कि कौआ नाक काट कर ले गया तो पहले आप नाक देखिएगा कि वह है या नहीं या फिर कौआ के पीछे भागिएगा. डीजीपी एमवी राव ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जान बूझ कर या थूक फेंक कोरोना फैलाने की बात पूरी तरह अफवाह है और ऐसे लोगों को हम चिह्नित कर रहे हैं और उन पर कठोर कार्रवाई करेंगे.

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कुछ स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट पर हिंदपीढी के लोगों का गुस्सा अब गोदी मीडिया हाय-हाय के रूप में प्रकट हुआ है. दो दिन पहले इलाके में कुछ मीडिया कर्मियों का लोगों द्वारा विरोध भी किया गया था.

स संबंध में हिंदपीढी के स्थानीय निवासी व रांची के अंजुमन इस्लामिया के सदस्य शकील अहमद ने जनज्वार से बातचीत के दौरान कहा - दरअसल हमारे इलाके में 31 मार्च को जब मलेशियाई महिला के रूप में पहली कोरोना मरीज चिह्नित की गयी तो उसके अगले दिन से संक्रमण के भय से इलाके में सफाई के लिए निगम कर्मियों ने आना बंद कर दिया. इसके बाद बैठक हुई जिसमें उन्होंने मास्क, ग्लब्स व अन्य चीजों की मांग की और उन्हें उसे उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया गया. फिर इसके बाद एक ही घर में छह कोरोना केस सामने आये तो इसके बाद थूकने वाला मामला और थूक लगाकार नोट देने वाली बात कही गयी. इस पर हमलोगों ने कहा कि निगम के सीसीटीवी फुटेज में वह वीडियो होगा जिसमें कर्मचारी इस बात को लेकर वहां अपना विरोध जता रहे होंगे तो वह हमें दिखा दें, लेकिन हमें दिखाया ही नहीं गया, जिससे ऐसे आरोपों पर संदेह उत्पन्न होता है.

हालांकि शकील खुद यह कहते हैं कि हिंदपीढी का बड़ा हिस्सा स्लम एरिया है, लोगों में जागरूकता का भी अभाव है. वे कहते हैं कि लोग एनआरसी को लेकर पहले से डरे हुए थे और जब इलाके में कोरोना का पहला केस सामने आया तो उसके बाद आंगनबाड़ी केद्रों से जुड़ी महिलाओं को एक फार्म देकर इलाके में जांच के लिए भेज दिया गया, जिस पर लोगों ने नाराजगी जतायी थी. उनका कहना है कि ऐसे संवेदनशील कार्याें में प्रशासन की जिम्मेवारी बनती है कि लोगों को वह पहले विश्वास में ले.

रअसल, पहले जांच फार्म का लोगों द्वारा विरोध जताए जाने के बाद जिला प्रशासन को उसे वापस लेना पड़ा था और फिर नया फार्म छपवाकर स्क्रीनिंग के लिए अधिक स्कील टीम को लोगों के बीच भेजा गया.

हिंदपीढी में ही रहने वाली वरिष्ठ पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता चंदोश्री ने इस मामले में जनज्वार से कहा - आप किसी भी न्यूज चैनल को देख लीजिए वे रिपोर्ट क्या करते हैं जमातियों ने बर्बाद कर दिया, पूरा संक्रमण फैला दिया. थोड़ी देर के लिए मान लीजिए गलती हुई है, लेकिन यह मामले का एक पक्ष है, कुछ लोगों की गलती के लिए एक वर्ग के सारे लोगों को गलत कहना कितना सही है. आधे से अधिक लोगों को पता ही नहीं है कि कोरोना क्या है. इसके बारे में तो पहले लोगों को जागरूक किया जाना जरूरी है. कोरोना तो किसी व्यक्ति का धर्म देखकर उसके शरीर में नहीं घुस रहा है, जिसको कोरोना होगा उसके सपंर्क में जो आएगा उसे होगा.

लाके में कोरोना को लेकर व्याप्त होने वाले तनाव पर चंदोश्री कहती हैं कि कुछ लोग उपद्रवी किस्म के होते ही हैं, वे घर पर भी हंगामा करते हैं, ऐसे लोग ही स्वयं बांस-बल्ली लगाकर इलाके को घेर देते हैं, उन्हें यह समझ नहीं आता कि कोई महिला आठवें महीने की गर्भवती है तो उसे कभी भी लेबर पेन हो सकता है और किसी हार्ट पेसेंट को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ सकती है.

कहती हैं कि जिनको जरूरत है वह घर से बाहर जाएगा ही, मीडिया इसको भी इस तरह से रिपोर्ट करता है कि फलाने रास्ते से निकलते लोग देखे गए. इलाके को सील किए जाने से उत्पन्न स्थिति को बताते हुए वे कहती हैं कि मेरे घर में छह तारीख से फल व सब्जी नहीं आया है, मैं एक पत्रकार हूं तो साथियों से जरूरत के कुछ सामान पहुंचने में मदद मिल जाती है, दूसरों का क्या हाल होगा.

थूकने वाले विवाद पर वे कहती हैं कि भारत में लोगों की तो हर जगह थूकने की आदत ही है, ऐसे में कोई रोड पर भी थूकेगा तो इसे कोरोना से जोड़ दिया जाना आसान है. वे कहती हैं कि इस मामले को हिंदू-मुसलिम बनाया गया है.

चंदोश्री हिंदपीढी इलाके के सामाजिक ताने-बाने पर बात करती हुई कहती हैं कि यहां के लोगों की तकलीफ को ऐसे समझिए कि रांची के अधिकांश टेलरिंग का काम यहीं होता है. यहां कोई 100 टेलरिंग शाॅप होंगे. बुटिक का बिजनेस यहीं की कारीगरों पर निर्भर है. शहर के अधिकतर मोबाइल मैकेनिक, कंपयूटर व इलेक्ट्रिक मैकेनिक यहीं के हैं. ऐसे लोगों के पास बहुत आय नहीं होती और ऐसी प्लांिनंग नहीं होती कि ऐसे हालात उत्पन्न हो गए तो कैसे गुजारा करेंगे. इनमें से ज्यादातर लोग बहुत गरीब होते हैं. वे कहती हैं कि इग्नोरेंस काफी अधिक है, महिलाएं कम पढी-लिखी या अशिक्षित हैं, उस पर पुरुषों का धौंस चलता है तो उन्हें दिक्कत काफी अधिक है.

इ्स्लामिया ने कोरोना से उत्पन्न हालात के लिए हिंदपीढी में 24 वोलंटियर तैनात किए हैं, जो हर घर के हालात की जानकारी लेते हैं और उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं. ये इस मुश्किल घड़ी में सामाजिक तनाव न उत्पन्न हो इसके लिए भी प्रयास करते हैं.

13 अप्रैल की देर रात तीन नए कोरोना मरीज को लेने जब एंबुलेंस गयी थी तो स्थानीय लोगों ने उसे घेर लिया था, जिसके बाद ड्राइवर वहां से भाग गया था. लोगों का विरोध मुख्य रूप से दो बातों को लेकर था कि जब दिन में मरीज का पता चल गया तो आधी रात में उसे लेने मेडिकल टीम क्यों आयी और बिना नंबर वाला एंबुलेंस क्यों भेजा गया. दरअसल, एक वास्तविकता यह भी है कि उपद्रवी तत्व किसी भी संवेदनशील मामले को तूल देने की हर संभव कोशिश करते हैं. लेकिन, ऐसे उपद्रवियों से हर आदमी को जोड़ कर नहीं देख सकता.

हिंदपीढी इलाके में वार्ड नंबर 22 व 23 मुख्य रूप से पड़ते हैं और कुछ दूसरे वार्ड का भी आंशिक हिस्सा इस इलाके में पड़ता है. लाॅकडाउन के कारण काम बंद होने से लोगों का हाल बेहद बुरा है. वार्ड नंबर 23 की पार्षद शाजदा खातून कहती हैं - निगम कर्मियों पर थूकने जैसी कोई बात नहीं है, नाला रोड की ओर ऐसी घटना होने की बात कही गयी, अगर ऐसी कोई घटना घटी होती तो मुझे आकर सूचना देना चाहिए था. वे कहती हैं कि पिछले दस दिनों से हम इलाके के सेनिटाइजेशन का काम कर रहे हैं. शाजदा बताती हैं कि बहुत सारे लोगों के पास खाने की दिक्कत हो गयी है. उन्होंने बताया कि अबतक जिला प्रशासन को उन्होंने 300 लोगों की सूची दी जिन्हें अनाज देने की जरूरत है, लेकिन उसमें 100 लोगों का ही अनाज वितरण के लिए मिला. उनका कहना है कि हम जितने जरूरमंदों की सूची प्रशासन को हर दिन सौंपे उतना अनाज उसी दिन मिलना चाहिए, ताकि दिहाड़ी कर कमाने-खाने वालों को दिक्कत नहीं

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