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राजनीति

ट्वीटर बन चुका है महिला नेताओं को बलात्कार-भद्दी गालियां और ध​मकियां देने का सार्वजनिक मंच

Prema Negi
24 Jan 2020 6:35 AM GMT
ट्वीटर बन चुका है महिला नेताओं को बलात्कार-भद्दी गालियां और ध​मकियां देने का सार्वजनिक मंच
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भारत की महिलायें जो राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय हैं सोशल नेटवर्किंग साइट ट्वीटर पर होती हैं तरह-तरह के दुर्व्यवहार का शिकार, बलात्कार, भद्दी गालियों समेत और भी तमाम तरह की धमकियां झेलती हैं इस सार्वजनिक मंच पर....

जनज्वार। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के अध्ययन ने अपने “ट्रोल पैट्रोल इंडिया : एक्सपोजिंग ऑनलाइन एब्यूज फेस्ड बाय वुमेन पॉलिटिशियंस इन इंडिया” अध्ययन से खुलासा किया है कि भारत में पॉलिटिक्स में सक्रिय महिलाओं को ट्वीटर पर तमाम तरह का उत्पीड़न झेलना पड़ता है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने यह अध्ययन ट्वीटर पर सक्रिय रहने वाली कई महिला राजनेताओं के ट्वीटर हैंडल पर नजर रखने के बाद किया है। इसमें 95 महिला राजनेताओं को भेजे गए लाखों ट्वीट की समीक्षा करने के बाद विश्लेषण किया गया है।

स अध्ययन के मुताबिक जो महिला राजनेता अपनी राय सोशल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त करती हैं, उन्हें न केवल उनकी राय के लिए, बल्कि उनकी अलग अलग तरीके से– जैसे लिंग, धर्म, जाति, वैवाहिक स्थिति और कई अन्य तरीके आनलाइन से गाली—गलौज, रेप समेत तमाम तरह की ध​मकियां दी जाती हैं।

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मनेस्टी ने अपने अध्ययन में भारत में 2019 के आम चुनावों के पहले, चुनावों के दौरान और उनके तुरंत बाद यानी मार्च-मई 2019 तक की तीन महीने की अवधि में, 95 भारतीय महिला राजनेताओं के 114,716 ट्वीट्स की समीक्षा की गयी है। इस अध्ययन में सोशल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त करने वाली सभी पार्टियों की महिला नेताओं को शामिल किया गया है।

मनेस्टी के अध्ययन के मुताबिक 95 महिला नेताओं को किए गए 13.8 फ़ीसदी ट्वीट्स या तो आपत्तिजनक थे या फिर अपमानित करने वाले। यानी इन सभी महिला नेताओं ने रोज़ 10 हज़ार से भी ज़्यादा अपमानजनक ट्वीट्स झेले।

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चौंकाने वाली बात यह भी है कि मुस्लिम महिला नेता बाक़ी धर्मों की महिलाओं के मुक़ाबले 91.4% ज़्यादा आपत्तिज़नक ट्वीट की शिकार बनायी गयीं। शाजिया इल्मी ने तो सोशल मीडिया साइट ट्वीटर पर ट्रोलिंग को लेकर कम्प्लेंट भी दर्ज करायी थी।

स अध्ययन के मुताबिक मुस्लिम महिला नेताओं के धर्म को लेकर जो अपमानजनक ट्वीट किए गए, वो हिंदू नेताओं के लिए गए ट्वीट्स की तुलना में दोगुने थे। हालांकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग की महिला नेताओं को भी अगड़ी जाति से ताल्लुक रखने वाली महिला नेताओं की तुलना में 59 फ़ीसदी ज़्यादा ट्रोलिंग का शिकार बनाया गया। उनके लिए जाति-आधारित अपशब्दों का तरह-तरह से इस्तेमाल किया गया।

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मनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने नवंबर 2019 में रिसर्च के नतीजों को ट्विटर पर साझा करते हुए इस सार्वजनिक मंच पर पूछा था कि क्या आम चुनाव के दौरान ऑनलाइन ट्रोलिंग रोकने के लिए ट्वीटर की तरफ से कोई ख़ास कदम उठाए गए थे?

सके जवाब में ट्वीटर की तरफ से कहा गया, "ट्वीटर को सार्वजनिक बातचीत से गुमराह करने वाली अभद्र भाषा. स्पैम और बाकी दुर्व्यवहारों से मुक्त कराना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है और हम इस दिशा में आगे भी बढ़ रहे हैं और लगातार कोशिश कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि ट्वीटर पर लोगों का अनुभव अच्छा रहे।'

गर कई महिला नेताओं ने ट्वीटर की इस बात पर आपत्ति जतायी और कहा कि ट्वीटर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने में नाकामयाब साबित हो रहा है।

भारत की महिलाओं के लिए किये गए हर सात में से एक ट्वीट आपत्तिज़नक था, जिसमें उनसे रेप, गालियों और तमाम तरह की गालियां दी गयी थीं। गौरतलब है कि लोकप्रिय महिला नेताओं को ट्वीटर पर ज़्यादा ट्रोलिंग झेलनी पड़ती है। हालांकि यह सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि इंटरनेशनल लेबल का हाल है। प्रगतिशीलता का टैग लगाये तमाम देशों में महिला नेताओं को ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ता है।

ट्वीटर पर ट्रोलिंग का बड़े पैमाने पर सामना करने वाली भाजपा नेता शाज़िया इल्मी कहती हैं, "महिलाओं को बढ़-चढ़कर राजनीति में आना चाहिए,मगर इस काम को करने की जो क़ीमत मैं चुकाती हूं, वो बहुत ज़्यादा है। ट्वीटर पर मैं लगातार ट्रोल होती हूं, ऑनलाइन उत्पीड़न का शिकार होती हूं। मैं कैसी दिखती हूं, मेरा रिलेशनशिप स्टेटस क्या है, मेरे बच्चे क्यों नहीं हैं...जितनी गंदी बातें आप सोच सकते हैं, मैं वो सब झेलती हूं। जिन लोगों को मेरे विचार पसंद नहीं आते, वो मेरे काम के बारे में टिप्पणी नहीं करते, बल्कि हरसंभव भाषा में मुझे 'वेश्या' घोषित करते हैं।"

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स बारे में आम आदमी पार्टी की आतिशी मार्लेना कहती हैं, सार्वजनिक जगहों पर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी महिला की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि उस सोशल नेटवर्किंग साइट की जिम्मेदारी है। अगर कोई महिला सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करती है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है। ठीक इसी तरह अगर कोई महिला ट्वीटर का इस्तेमाल कर रही है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना ट्वीटर की जिम्मेदारी बनती है।'

पैमाने पर ट्वीटर पर बलात्कार समेत तमाम गालियां झेलने वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की नेता कविता कृष्णन कहती हैं, ऑनलाइन ट्रोलिंग से मानसिक तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है। कई बार जब किसी ट्वीट को रिपोर्ट करते हैं और ट्वीटर कहता है कि वो ट्वीट उसकी नीतियों का उल्लंघन नहीं करता। ऐसे में इन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों को रिपोर्टिंग और शिकायत का सारा दिखावा बंद कर देना चाहिए। अगर किसी पर कोई कार्रवाई ही नहीं होनी हैं, तो नीतियां बनाए रखने का ढोंग क्यों?"

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