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CAA के विरोध में धरनारत महिलाओं पर पुलिसिया ताडंव, मारपीट से 3 महिलायें बेहोश और कई अस्पताल में भर्ती

Prema Negi
19 March 2020 12:27 PM GMT
CAA के विरोध में धरनारत महिलाओं पर पुलिसिया ताडंव, मारपीट से 3 महिलायें बेहोश और कई अस्पताल में भर्ती
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आंदोलनकारी महिलाओं पर लात-घूंसे बरसाती पुलिस की वर्दी पर नेम प्लेट भी नहीं थी और उन्होंने रुमाल से चेहरे को ढका हुआ था....

जनज्वार, लखनऊ। पिछले लंबे समय से लखनऊ के घंटाघर पर CAA के विरोध में बैठी महिलाओं पर आज 19 मार्च को यूपी पुलिस ने जमकर बर्बरता दिखायी। पुलिस ने आंदोलनरत महिलाओं के पेट पर लाठी, लात और घूसों से मारा। जिससे मौके पर तीन महिलाएं बेहोश हो गयीं और पुलिसिया मार के बाद कई महिलाएं अस्पताल में एडमिट हुई हैं।

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प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर आ रहे वीडियोज के मुताबिक पुलिस ने हैवानियत की हदें पार करते हुए मुस्लिमों के पवित्र धार्मिक ग्रंथ क़ुरआन और जानमाज़ पर लात मारी।

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आंदोलनकारी महिलाओं का कहना है कि महिलाओं पर बर्बरता कर रही पुलिस की वर्दी पर नेम प्लेट भी नहीं थी और उन्होंने रुमाल से चेहरे को ढका हुआ था।

स दौरान पुलिस ने एक विकलांग दंपति को जलील भी किया। पति को धरने से बाहर निकाला और मंच पर तोड़ फोड़ की।

पुलिसकर्मियों ने न केवल जवान महिलाओं के साथ अभद्रता की बल्कि बुजुर्ग महिलाओं तक को पीटा। फिलहाल लखनऊ घंटाघर को भारी मात्रा में पुलिस और रैपिड एक्शन फ़ोर्स ने घेर लिया है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि योगी की पुलिस जबरन धरना खत्म करवाना चाहती है इसलिए अपनी पुलिस से ऐसी बर्बरता करवा रही है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया दमन जारी है।

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स घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जमई ने एक ट्वीट में लिखा कि शांतिपूर्वक घंटाघर की महिलाओं ने देश-दुनिया का ध्यान खींचा, 3 साल बेमिसाल में बेटियों के साथ योगी राज में यही रिवाज है, यह सही है कि से हमें एहतियात बरतने की जरूरत की जरूरत है और महिलाएं अपने विवेक से आंदोलन की दिशा को तय करे!

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हीं इस घटना को लेकर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने भी निंदा की है। पार्टी ने कहा है कि बुजुर्ग महिलाओं तक को नहीं बख्शा गया और कई महिलाएं तो बेहोश हो गईं, जो दिखाता है कि योगी सरकार निरंकुश हो गई है।

भाकपा माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने एक बयान जारी कर कहा कि शांतिपूर्ण महिला आंदोलनकारियों और समर्थकों पर एक-के-बाद-एक मुकदमे लादने व उन्हें डराने की कवायद करने के बाद योगी सरकार लोकतांत्रिक आंदोलन को खत्म कराने के लिए दमन की सारी हदें पार कर गई है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों का मनोबल तोड़ने की कोशिश सफल नहीं होगी और निहत्थी महिलाओं पर लाठी चलवाने वाली सरकार को सत्ता में रहने का हक नहीं है।

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