Top
शिक्षा

बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय ने बीएड की फीस 90,000 से बढ़ाकर की 1,50,000 रुपये, भूख हड़ताल पर बैठे छात्र

Nirmal kant
28 Nov 2019 8:08 AM GMT
बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय ने बीएड की फीस 90,000 से बढ़ाकर की 1,50,000 रुपये, भूख हड़ताल पर बैठे छात्र

बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय ने बीएड की फीस 90,000 से बढ़ाकर की 1,50,000 रुपये, प्रदर्शनकारी छात्रों ने शुरु की हड़ताल, विश्वविद्यालय प्रशासन फीम कम करने को तैयार नहीं, रांची भवन से भी मिल रहा केवल आश्वासन...

जनज्वार, रांची। झारखंड के धनबाद का बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के छात्र 26 नवंबर से विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। इससे पहले अपनी मांगों को लेकर छात्रों ने 22 नवंबर से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। विश्वविद्यालय और इससे संबंद्ध कॉलेजों के छात्र बीएड में हुई फीस बढ़ोतरी के खिलाफ जबआंदोलन कर रहे थे जब प्रशासन ने उनकी मांगों को नहीं माना तो छात्रों ने भूख हड़ताल पर बैठ गए। फीस बढ़ोतरी के कारण करीब 300 विद्यार्थी प्रभावित होंगे।

सिंडिकेट की बैठक में बीबीएमकेयू ने विश्वविद्यालय के अंतर्गत सभी बीएड के कॉलेजों का फीस बढ़ाकर 90 हजार से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए कर दी है, जिसके बाद से छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करना शुरू कर दिया। छात्रों का कहना है कि उनकी काउंसिलिंग पहले ही हो चुकी है। छात्रों का कहना है कि पुरानी फीस देकर हम लोगों ने एडमिशन ले लिया था, लेकिन बाद में विश्वविधालय द्वारा फीस बढ़ाना पूरी तरह से गलत है।

संबंधित खबर : फीस बढ़ोत्तरी को लेकर प्रदर्शन कर रहे पतंजलि कॉलेज के छात्रों को बालकृष्ण ने धमकाया-पिटवाया, कहा तुमसे मैं सवा 3 लाख रुपये वसूलूंगा कोर्ट के जरिए

मामले को लेकर विनोद बिहारी विश्वविद्यालय के छात्र रमेश कहते हैं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सिंडिकेट की मीटिग करने के बाद हम लोगों की फीस में बढ़ोतरी कर दी। परीक्षा में पास होकर हम लोगों को सीट मिली थी, जिसका नोटिस विश्वविद्यालय की ओर से मिला था, लेकिन जब हम लोग कॉलेज में एडमिशन के लिए आए तो हमें पता चला कि हमारी फीस को 90 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार तक कर दिया गया है।

मेश ने बताया, 'इसके बाद वार्ता के लिए हम लोगों को यहां बुलाया गया जिसमें विश्वविद्यालय ने कहा कि हम लोगों ज्यादा से ज्यादा फीस को 1 लाख 35 हजार कर सकेंगे। इससे कम नहीं। ऐसा हर बार मींटिग में बुलाकर कहा जा रहा हैं लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि जब एक बार हमें बता दिया गया है तो बार-बार हमारे साथ मीटिंग क्यों की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन हम लोगों को डरा रहा है और हम लोगों के आंदोलन को तोड़ना चाहता है।'

संबंधित खबर : राजस्थान की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में कश्मीरी छात्रों से मारपीट, पीड़ित छात्र बोले किया जाता है हमारे साथ भेदभाव

मेश आगे कहते हैं, 'पहले हम लोगों की मांग थी कि फीस को वापस 90,000 कर दिया जाए, लेकिन बाद में हम सब लोगों ने सहमति बनाई कि हम 10,000 तो ज्यादा दे सकते हैं लेकिन इतनी फीस देने में यहां पर कोई सक्षम नहीं है। इसके 300 की संख्या में हम छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ धरना देना शुरू किया और हमारा यह आंदोलन तबतक जारी रहेगा जबतक हमारी मांगो को मान नहीं लिया जाता।

संबंधित खबर : फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ उत्तराखंड आयुष विश्वविद्यालय के छात्रों का आंदोलन जारी, वाइस चांसलर ने कहा 15 दिन के भीतर होगा समाधान

मामले को ही लेकर सुभाष नाम के छात्र ने जनज्वार को बताया कि हमारी फीस को 90,000 से बढ़ाकर 1 लाख 35 हजार रुपए तक कर दिया गया हैं। हम लोगों की विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ बातचीत हुई तो उन्होंने 1 लाख 35 हजार से फीस कम करने से इंकार कर दिया। हमने मांग रखी कि फीस को एक लाख तक किया जाए, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद हम लोग रांची राजभवन भी गए जिसके बाद राजभवन की तरफ से प्रशासन को फोन भी आया, जिसमें फीस को कम करने के लिए कहा गया था। लेकिन राजभवन के आदेशों को भी विश्वविद्यालय प्रशासन नजरअंदाज करते कह रहा है कि अगर राजभवन की तरफ से कुछ लिखित में मिलता है तो हम कार्रवाई कर सकते हैं। इसके बाद हम लोग फिर राजभवन गए तो वहां से हम लोगों को कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया, मगर अभी तक कोई कार्रवाई की नहीं गई है।

संबंधित खबर — JNU : हमला देशभर के विश्वविद्यालयों पर हो रहा लेकिन नाम सिर्फ जेएनयू का उछाला जा रहा

सुभाष ने आगे कहा, 'हम लोगों की फीस बढ़ोतरी 18 जुलाई को कर दी गई थी। 15 जुलाई को कांउसलिंग की गई थी फिर 15,16 और 17 जुलाई को कॉलेज बंद हुआ और 18 जुलाई को हमारी फीस में बढ़ोतरी कर दी गई, यहां पढ़ने वाले किसी छात्र को पता नहीं था कि फीस में इतनी बढ़ोतरी कर दी जाएगी। सभी ने सोचा था कि हमारी बीएड की पढ़ाई 90,000 रुपये में कर दी जाएगी।'

सुभाष सवाल करते हुए कहते हैं, '18 जुलाई को सिंडिकेट की मींटिग में ऐसा क्या हुआ जो रातोंरात डेढ़ लाख रुपए तक फीस लेने का फैसला ले लिया गया। यह न्यायसंगत नहीं है। हमारी विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग है कि जो फीस में बढ़ोतरी की गई है, उसे वापस लिया जाए और 90,000 में इस कोर्स को चलाया जाए ताकि सभी गरीब छात्रों को पढ़ने का अवसर मिल पाए।

संबंधित खबर : ‘जेएनयू में फीस का उतना भी खर्च नहीं जितना लगता है नेताओं का एक दूसरे को गुलदस्ता देने में’

फीस बढ़ोत्तरी को लेकर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन को लेकर जब हमने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछा तो सभी अधिकारी जवाब देने से बचते रहे। रजिस्ट्रार एमके सिंह ने कहा, 'मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।' इसके बाद जब जनज्वार ने विश्वविद्यालय के स्टुडेंट्स वेल्फेयर के डीन एलबी सिंह ने कहा, अभी मीटिंग में हूं, आपसे बात नहीं कर सकता हूं, कुछ घंटों बाद आपको जानकारी देता हूं।

Next Story

विविध

Share it