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Exclusive : दिल्ली में दंगों के बाद अब पुलिस टॉर्चर से एक युवक की मौत का मामला आया सामने

Vikash Rana
6 March 2020 12:28 PM GMT
Exclusive : दिल्ली में दंगों के बाद अब पुलिस टॉर्चर से एक युवक की मौत का मामला आया सामने
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अंशुमन के जीजा ने बताया, 'पुलिस ने अंशुमन के साथ बुरे तरीके से मारपीट कर उसको काफी डराया, इसके अलावा मामले को सुलझाने के लिए 5 लाख रुपए की मांग की गयी...

दिल्ली से विकास राणा की खास रिपोर्ट

जनज्वार। दिल्ली के शादीपुर में 1 मार्च को दंगों की अफवाह फैलने के बाद दिल्ली पुलिस के द्वारा एक युवक को गिरफ्तार करने और उसकी पुलिस टॉर्चर के कारण मौत का मामला सामने आया है। युवक की मौत 5 मार्च की है, जबकि उसे पुलिस ने 3 मार्च को गिरफ्तार किया था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने अंशुमन को छोड़ने और मामले को रफा-दफा करने के बदले 5 लाख रुपए की भी मांग की थी।

24 और 25 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़कने के बाद 27 फरवरी तक बलवा प्रभावित इलाके करीब-करीब शांत हो गए, लेकिन अफवाहों का माहौल तेज हो गया। शादीपुर के पांडव नगर स्थित बी ब्लॉक में रहने वाले अंशुमन का मामला भी उसी अफवाह का नतीजा जान पड़ता है। 23 वर्षीय अंशुमन की छोटी बहन के पति प्रहलाद सिंह ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए जनज्वार से कहा कि रंजीत नगर पुलिस की कस्टडी में मेरे साले को पुलिस ने बहुत मारा, जिसके कारण वह बहुत हताश था और बाद में उसकी मौत हो गयी।

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अंशुमन के जीजा ने बताया, 'पुलिस ने अंशुमन के साथ बुरे तरीके से मारपीट कर उसको काफी डराया। इसके अलावा पुलिस द्वारा मामले को सुलझाने के लिए 5 लाख रुपए मांग की गयी। पुलिस FIR दर्ज किए बिना ही अंशुमन को घर से उठा ले गई। उसके बाद थाने में ले जाकर उसके साथ बुरी तरह से मारपीट की। जब हम लोग उससे मिलने रंजीत नगर थाने गए तो पुलिस वालों ने अंशुमन से हमें नहीं मिलने दिया।'

वहीं इस मामले में मृतक अंशुमन के चचेरे भाई अमित कहते हैं, अंशुमन मेरे चाचा का इकलौता लड़का था। चाचा की मृत्यु के बाद से वही घर की जिम्मेदारियों को अकेला संभाल रहा था। सुबह दफ्तर जाने और शाम को घर लौटने के अलावा वह इधर-उधर कभी घूमने भी नहीं जाता था।

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के जीजा प्रहलाद सिंह आगे बताते हैं, '1 मार्च को फैली अफवाह के बाद हमारी गली में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। अफवाह के बाद गली में भगदड़ होनी शुरू हो गई थी। लोगों को लगने लग गया था कि इलाके में दंगे शुरू हो चुके हैं। अफवाह के कारण मेरा साला अंशुमन आत्मरक्षा के लिए तलवार लेकर नीचे खड़ा हो गया। यह वही तलवार थी, जिसका इस्तेमाल हम लोग शादियों के दौरान करते हैं।'

'...इसी दौरान पीछे की गली में रहना वाला एक लड़का जो मुस्लिम था, उसको तलवार हल्की सी छू गई। मामला इतना खराब हो चुका था कि कब ये हादसा हो गया, इसका पता नहीं चल पाया। लेकिन उस मुस्लिम लड़के को किसी तरह की कोई चोट नहीं आई। अगले दिन 2 मार्च को अंशुमन के परिवार और उस लड़के के परिवार बीच में सुलह हो गई। लेकिन 3 मार्च की शाम 6 बजे के आसपास पुलिस वाले मेरे साले को दंगे का आरोपी बताते हुए रंजीत नगर थाने ले गए। इसके बाद रात 11 बजे से लेकर 11:30 बजे तक पुलिस वालों ने अंशुमन को बुरे तरीके से टॉर्चर किया। जब हम लोग अशुंमन से मिलने के लिए थाने गए तो वो काफी डरा हुआ था। लेकिन इस दौरान पुलिस ने हमे उससे मिलने नहीं दिया। बाद में जब पुलिस ने मिलने की इजाजत दी तो पुलिस ने धमकी भरे शब्दों से कहा कि तुम इससे आखिरी बार मिल लो, अगली इसके बाद अगली मुलाकात जेल में होगी।'

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अंशुमन के जीजा इतना कहते रो पड़ते हैं। वे पूछते हैं, 'अंशुमन ने कोई इतना बड़ा अपराध तो नहीं किया था कि उसे जेल में डाला जा सके? अंशुमन ने केवल अपने आप को और अपने परिवार को बचाने के लिए तलवार का इस्तेमाल किया था और इस तलवार से किसी तरह की कोई घटना भी नहीं हुई थी। ना ही इसने तलवार का इस्तेमाल किसी की जान लेने के लिेए किया था?'

अंशुमन के चचेरे भाई के अनुसार, 'उस दिन रात 12 बजे के बाद भी हम लोग पुलिस थाने के बाहर ही खड़े रहे। इसी दौरान पुलिस वाले अंशुमन को कंबल में लपेटकर थाने से बाहर लेकर आए। इस दौरान जब हम लोगों ने पुलिस वाला पूछा कि अंशुमन को कहा ले जाया जा रहा है तो पुलिस वाले मेडिकल जांच की बात कहते हुए उस सफेद कलर की स्विफ्ट डिजाइयर गाड़ी में ले गए। जो पुलिस वाले अंशुमन को ले गए, उनमें से दो वर्दी में थे और दो पुलिस वालों ने वर्दीं नहीं पहन रखी थी।

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अंशुमन के जीजा प्रहलाद के अनुसार, 'इसके बाद पुलिस वालों ने अंशुमन के साथ क्या किया, उसको कितना टॉर्चर किया हमें कुछ नहीं पता। बाद में पुलिस वालों ने अंशुमन को घर के सामने लाकर खड़ा कर दिया। इसी दौरान चार पुलिस वालों में से दो पुलिस वाले घर के बाहर खड़े होते हैं और जब उनसे हमलोग पूछते हैं कि अंशुमन को क्यों लाया गया है तो पुलिस वाले बोलते हैं कि कपड़े बदलवाने के लिए लाए हैं। इसके बाद पुलिस वाले उसे घर की पाचंवी मंजिल में ले जाते हैं। हम लोग पूछते भी हैं कि उसे 5वीं मंजिल पर क्यों ले जा रहे हैं और कपड़े नीचे ही बदले जा सकते हैं, लेकिन पुलिस वाले हम लोगों की नहीं सुनते।'

'... दो पुलिस वाले अंशुमन को पाचंवी मंजिल में लेकर गए। इसके बाद हमें अगली खबर अंशुमन के नीचे कूदने की मिली थी। हम लोगों को कुछ नहीं पता की वो खुद कूदा है या गिराया गया है। पुलिस वालों ने शायद इतना ज्यादा टॉर्चर कर दिया था कि उसको कूदने के अलावा ओर कुछ नहीं सूझा। या पता नहीं।'

सके बाद के घटनाक्रम को बताते हुए अंशुमन के जीजा आगे कहते हैं, 'नीचे गिरने के बाद हम लोग अंशुमन को ऑटो में बिठाकर अस्पताल ले जाने लगे तो उस दौरान भी पुलिस ने ऑटो वाले को और हमारे परिवार के सदस्यों को गोली मारने की धमकी देते हुए आरएमएल या लेडी हार्डिग अस्पताल ले जाने के लिए बोला। जब हमने इसका विरोध किया तो पुलिस ने गोली मारने की धमकी दे दी। लेकिन विरोध करने के बाद हम नजदीक के बीएल कपूर अस्पताल ले गए। वहां भी पुलिस हमारे साथ गयी और इस दौरान भी पुलिस ने हमें अंदर नहीं जाने दिया।'

अंशुमन के जीजा के मुताबिक, 'इस दौरान दिल्ली के राजेंद्र नगर इलाके के बीएल कपूर अंशुमन को तीन दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया, हमें अभी भी कोई जानकारी नहीं थी की अंशुमन जिंदा है या मर गया। फिर 5 फरवरी को पुलिस ने हमें उसकी मौत की जानकारी दी, जिसके बाद जब हमने डेड बॉडी की मांग की तो उसके लिए भी हमें दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

पुलिस ने बिना बताए अंशुमन की बॉडी को मौलाना आजाद अस्पताल में शिफ्ट कर दिया था। इस दौरान किसी भी तरह की कोई कागजी कार्रवाई नहीं की गई। शाम के 4 बजे के करीब हम लोगों को बॉडी मिली है। इस दौरान हमें अपने स्थानीय नेताओं समेत आप के नेताओं को फोन भी किया, लेकिन हमें किसी तरह का कोई न्याय नहीं मिला।'

स मामले में अंशुमन के चचेरे भाई अमित बताते हैं, 'हमारे सामने ही पुलिस के कुछ अधिकारियों ने अंशुमन की तरफ देखते हुए उससे धमकी भरे शब्दों में कहा कि तू अब लंबे समय तक जाएगा, तुझे कोई नहीं बचा सकता। अंशुमन को गिरफ्तार किए जाने के बाद से ही पुलिस 3 बार हमारे घर पर बिना किसी सर्च वारंट के लाए घर की तलाशी करने आई थी।'

पुलिस की तरफ से जनज्वार से बात करते हुए एसएचओ नरेंद्र त्यागी ने इस मामले में कुछ भी बताने से साफ मना कर दिया। एसएचओ ने 4 आरोपी पुलिस वालों को निलंबित किए जाने को लेकर भी कुछ बताने से मना कर दिया है। नरेंद्र त्यागी का कहना है कि मामला डीसीपी के पास इसलिए मामले में किसी तरह की कोई जानकारी नहीं दे सकते। इस मामले में डीसीपी से बातचीत की कोशिश की गयी, पर उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

पूरा मामला सीधे जानने के लिए वीडियो देखें कि क्या कहते हैं अंशुमन के परिजन

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