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उत्तराखण्ड का ओपन विश्वविद्यालय मतलब सबकुछ ओपन, न कोई नियम न कोई कहने वाला

Janjwar Desk
2 Sep 2021 4:08 PM GMT
उत्तराखण्ड का ओपन विश्वविद्यालय मतलब सबकुछ ओपन, न कोई नियम न कोई कहने वाला
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(एसोसिएट प्रोफेसर पद की भर्ती के लिए 8 साल असिस्टेंट प्रोफेसर के स्तर का न्यूनतम अनुभव जरूरी है।)

2017 और 2019 के बीच सभी नियम कानूनों को धता बताकर अपने चहेतों को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में मनमाफिक पोस्टिंग से नवाजा है, जिन लोगों को भी नियुक्ति दी गई, वो सभी मंत्री और कुलपति के अपने या RSS से जुड़े लोग हैं....

सलीम मलिक की रिपोर्ट

देहरादून, जनज्वार। देश-दुनिया का कोई भी शिक्षण संस्थान हो वह अपने अकादमिक चरित्र के कारण जाना जाता है, लेकिन उत्तराखण्ड के हल्द्वानी में स्थित मुक्त विश्वविद्यालय (Uttarakhand Open University) इस मामले में जरा विरला किस्म का विश्वविद्यालय है। जैसा की नाम से ही जाहिर है, यह संस्थान ओपन है। ओपन भी इतना कि कोई कहीं से आये, कहीं से भी जाये, कोई फर्क नहीं पड़ता। अपने स्थापना के समय से ही यह हमेशा चर्चाओं में बना रहा। लेकिन चर्चाएं इसके शैक्षिक वातावरण की नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की।

इस संस्थान के पास भ्रष्टाचार के किस्से इतने ज्यादा हैं कि कभी-कभी लगता है इसकी स्थापना इसी भ्रष्टाचार को पालने के लिए नहीं हुई। इन दिनों इस संस्थान में अपनी तरह के ऐसे इकलौते भ्रष्टाचार की कहानी चल रही है कि इसे भारत का सर्वाधिक विचित्र भ्रष्टाचार भी कहा जा सकता है।

जब पूरा भारत कोरोना महामारी के खौफ से अपने घरों में बन्द था तब इस संस्थान में भ्रष्टाचार के इस महाघोटाले की पटकथा लिखी जा रही थी। संस्थान के कुछ पदों पर हुई नियुक्तियों के इस घोटाले की खबर जनज्वार पूर्व में ही विस्तार से प्रकाशित कर चुका है, जिसके बाद यह मामला अब सरकार के गले की हड्डी बनता नज़र आ रहा है।

विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े इस प्रदेश में अपनी राजनीतिक ज़मीन तलाशने की जद्दोजहद में जुटी आम आदमी पार्टी ने भ्रष्टाचार के इस मुददे को लपककर प्रदेश के शिक्षा मंत्री सहित सभी जिम्मेदार लोगों को जेल भेजने की मांग करनी शुरू कर दी है। पार्टी ने भाजपा सरकार पर ओपन यूनिवर्सिटी को निजी कंपनी में बदलने का आरोप लगाया है। बृहस्पतिवार 2 सितंबर को आप के प्रदेश प्रवक्ता नवीन पिरशाली ने विश्वविद्यालय में अवैध नियुक्तियों के मामले में सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए मुख्यमंत्री से उन्हें बर्खास्त कर जेल भेजने की मांग की।

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नवीन ने कहा कि राज्य की सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबी हुई सरकार अब शिक्षित बेरोजगारों का हक भी छीन रही है। उन्होंने घोटाले का पूरा ब्यौरा सिलसिलेवार रखते हुए बताया कि उच्च शिक्षा मंत्री ने साल 2017 और 2019 के बीच सभी नियम कानूनों को धता बताकर अपने चहेतों को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में मनमाफिक पोस्टिंग से नवाजा है, जिन लोगों को भी नियुक्ति दी गई, वो सभी मंत्री और कुलपति के अपने या RSS से जुड़े लोग हैं।

नियुक्तियों के इस घोटाले की खबर नियुक्ति की सूची जारी होने से पहले ही 30 अगस्त, 2019 को मीडिया में आ गई थी, जिसमें साफ-साफ बताया गया था कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में सहायक क्षेत्रीय निदेशक (असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर) के आठ पदों पर नियुक्ति में बड़ा घोटाला होने वाला है। इस खबर में लिखा था कि इन आठ पदों पर पहले से ही सेलेक्ट होने वाले कैंडिडेट्स के नाम तय हैं। उन सभी 8 नामों को प्रकाशित भी किया गया था। खबर प्रकाशित होने के ठीक दो दिन बाद 2 सितंबर 2019 को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने जब असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर के पदों पर चयनित हुए लोगों की लिस्ट जारी की गई तो सभी आठ के आठ नाम वही थे, जो 30 अगस्त को मीडिया में आ चुके थे।

मीडिया में नाम आने और विवाद के बाद भी सभी उन नामों को नौकरी दी गई, जो उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत और कुलपति के रिश्तेदार थे। इनमें सबसे पहला नाम था प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत के पीआरओ गोविंद सिंह का, दूसरा नाम था कुलपति की पर्सनल सेकेट्री रेखा बिष्ट का, तीसरा परीक्षा करवाने वाले चीफ एक्जाम कंट्रोलर प्रोफेसर पीडी पंत के रिश्तेदार भास्कर जोशी का, चौथा नाम असिस्टेंट एक्जाम कंट्रोलर डॉक्टर सुमित प्रसाद की पत्नी रुचि आर्य का और पांचवां नाम आरएसएस के प्रचारक बृजेश बनकोटी का शामिल था।

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ईमानदारी का चोला ओढ़ने की कोशिश करने वाले 'स्वयंभू ईमानदार' प्रदेश के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत की तो इस खुलासे ने ऐसी पोल खोली कि वह खुद भी शायद अब अपने को ईमानदार कहने का साहस न जुटा सकें। भ्रष्टाचार की गंगा में गोते लगाते हुए उन्होंने तो औरों के साथ अपने पीआरओ को भी यूनिवर्सिटी में लगवा दिया। कागजों में यूनिवर्सिटी के यह कर्मचारी अब भी मंत्री के आगे-पीछे घूमने का काम करते हैं, लेकिन तनख्वाह सरकार की यूनिवर्सिटी से प्राप्त करते हैं।

नवीन ने आगे बताया कि इस खुलासे के बाद 4 जुलाई 2020 को पंतनगर निवासी रमेश सिंह नाम के व्यक्ति ने राज्यपाल को एक शिकायती पत्र लिखा। इसमें इस पूरे अवैध नियुक्तियों के खेल का चिट्ठा लिखा हुआ था। 27 जुलाई को राज्यपाल के संयुक्त सचिव ने प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के प्रभारी सचिव को निर्देश दिए कि असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर (एआरडी) के आठ पदों पर नियुक्ति में हुए भ्रष्टाचार की जांच की जाए। साथ ही असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्तियों में जो फिक्सिंग के आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी भी जांच की जाए।

ये चिट्ठी देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मानव संसाधन मंत्री, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और यूजीसी को भी भेजी गई, लेकिन जिस मामले की जांच की जानी चाहिए थी, उसमें मार्च 2021 को लिस्ट जारी कर उन सभी अभ्यर्थियों में से 8 लोगों को नौकरी के लिए चुन लिया गया। एक अभ्यर्थी मीनाक्षी राणा के बदले ABVP से जुडे विशाल शर्मा को उस लिस्ट में समायोजित किया गया।

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शिकायती पत्र में जिन लोगों की अवैध नियुक्ति की पूर्व सूचना दी गई थी, उनमें एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पीडी पंत, हिस्ट्री के पद पर मदन मोहन जोशी, पत्रकारिता विभाग में राकेश रयाल, कम्प्यूटर साइंस में जीतेंद्र पांडे, कॉमर्स में गगन सिंह, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में घनश्याम जोशी, लॉ डिपार्टमेंट में दीपांकुर जोशी, हिंदी विभाग में राजेंद्र सिंह, एजुकेशिन डिपार्टमेंट में सिद्धार्थ पोखरियाल और फिजिक्स डिपार्टमेंट में मीनाक्षी राणा का नाम था। जब रिजल्ट आया तो केवल मीनाक्षी राणा को छोड़कर बाकी आठ नाम वही थे। इनमें एक नाम सिद्धार्थ पोखरियाल का है, जो तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के करीबी हैं।

आप प्रवक्ता नवीन पिरशाली ने कहा प्रदेश में पढ़े-लिखे युवक युवतियां नौकरियों के लिए धक्के खा रहे हैं। आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उन बेरोजगारों का हक मारकर अपने चहेतों पर दरियादिली दिखा रही है। इस खेल में कई अफसर और नेता जुड़े हुए हैं, क्योंकि एक और 56 नियुक्तियों का मामला उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी आया है, जो अवैध रूप से की गई हैं।

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इस मामले में आम आदमी पार्टी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से उच्च शिक्षा मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत का इस्तीफा मांगने की मांग की। इस्तीफा न दिये जाने पर कैबिनेट से हटाकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाये।

इसके साथ ही सभी पदों पर हुई भर्तियों को तत्काल रद्द किया जाए और नए सिरे से भर्ती कर पारदर्शी तरीके से योग्य उम्मीदवारों का चयन करने, गलत तरीके से सरकारी नौकरी हड़पने वालों से सारे वेतन, भत्तों की वसूली साथ उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने, घोटाले में शामिल मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ओमप्रकाश नेगी और अन्य सभी अधिकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग दोहरायी है। पार्टी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इन मांगों को नहीं माना गया तो आप पार्टी प्रदेशभर में बड़ा जनांदोलन करेगी।

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