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जबतक जीयेगा जेल में रहेगा बृजेश ठाकुर, मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेपकांड के 11 आरोपियों को सजा

Janjwar Team
12 Feb 2020 4:10 AM GMT
जबतक जीयेगा जेल में रहेगा बृजेश ठाकुर, मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेपकांड के 11 आरोपियों को सजा
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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम की अधीक्षिका इंदु कुमारी डराती धमकाती थी लड़कियों को, उन्हें जबरदस्ती दुष्कर्म करवाने के लिए करती थी तैयार और विरोध करने पर पीटती थी, बालिका गृह में हो रही दरिंदगी में शामिल रही इंदु कुमारी ब्रजेश की रही है बड़ी राजदार...

जेपी सिंह की रिपोर्ट

बिहार के राजनीतिक गलियारों में तूफान लाने वाले मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर को उसके शेष जीवन के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। 20 जनवरी को दिल्ली की साकेत कोर्ट ने इस मामले में ब्रजेश ठाकुर समेत 19 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इन सभी को शेल्टर होम में रहने वाली लड़कियों के यौन उत्पीड़न का दोषी करार दिया गया था।

ल 11 फरवरी को हुई मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बृजेश ठाकुर समेत 11 अन्य लोगों को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने एक आरोपी मोहम्मद साहिल उर्फ विक्की को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ की अदालत ने मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर समेत 19 लोगों को 1045 पन्नों के अपने आदेश में दोषी ठहराया था। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो ऐक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया था।

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च्चतम न्यायालय के निर्देश पर इस मामले को 7 फरवरी, 2019 को बिहार के मुजफ्फरपुर की स्थानीय अदालत से दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर की पॉक्सो कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। यह मामला टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) द्वारा 26 मई, 2018 को बिहार सरकार को एक रिपोर्ट सौंपने के बाद सामने आया था।

बिहार पीपल्स पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके बृजेश ठाकुर को कोर्ट ने दोषी पाया था। पॉक्सो ऐक्ट की धारा 6 के तहत बृजेश ठाकुर को नाबालिग बच्चियों के यौन उत्पीड़न और आईफीसी की धाराओं के तहत रेप और गैंगरेप के मामले में दोषी पाया गया था। कोर्ट ने ब्रजेश ठाकुर को आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), धारा 324 (खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाने), धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाने) समेत कई मामलों में दोषी पाया गया है।

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मुजफ्फरपुर के बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के पूर्व प्रमुख वर्मा, सीडब्ल्यूसी के सदस्य कुमार और अन्य आरोपी गुड्डू पटेल, किशन कुमार और रामानुज ठाकुर को पॉक्सो कानून के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न और आईपीसी एवं पॉक्सो ऐक्ट के तहत आपराधिक षड्यंत्र, बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, चोट पहुंचाने, बलात्कार के लिए उकसाने और किशोर न्याय कानून की धारा 75 के तहत दोषी ठहराया गया था। दो आरोपियों- राम शंकर सिंह और अश्विनी को आपराधिक षड्यंत्र और बलात्कार के लिए उकसाने के अपराधों का दोषी पाया गया। इनके अलावा महिला आरोपियों- शाइस्ता प्रवीन, इंदु कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी को आपराधिक षड्यंत्र, बलात्कार के लिए उकसाने, बच्चों के साथ क्रूरता और अपराध होने की रिपोर्ट करने में विफल रहने का दोषी पाया गया था।

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स मामले में बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री और जेडीयू की तत्कालीन नेता मंजू वर्मा को भी आलोचना का शिकार होना पड़ा था, जब उनके पति के ठाकुर के साथ संबंध होने के आरोप सामने आए थे। मंजू वर्मा ने 8 अगस्त, 2018 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में 34 छात्राओं के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। मेडिकल टेस्ट में तकरीबन 34 बच्चियों के यौन शोषण की पुष्टि हुई थी। सुनवाई के दौरान पीड़ितों ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें नशीला दवाएं देने के साथ मारा-पीटा जाता था, फिर उनके साथ जबरन यौन शोषण किया जाता था। केस में सीबीआइ की चार्जशीट के मुताबिक मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड कर्मचारी भी शामिल थे। वे भी मासूम बच्चियों को दरिंदगी का शिकार बना रहे थे। यह भी आरोप है कि बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी बच्चियों के साथ गलत काम में शामिल थे।

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मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर ने 2000 में मुजफ्फरपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से बिहार पीपल्स पार्टी (बीपीपी) के टिकट पर चुनाव लड़ा था और हार गया था। आरोपियों में 12 पुरुष और आठ महिलाएं शामिल थी। यह मामला टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की ओर से 26 मई, 2018 को बिहार सरकार को सौंपी गई एक रिपोर्ट के बाद सौंपने आया था। इस रिपोर्ट में किसी आश्रय गृह में पहली बार नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न का खुलासा हुआ था।

बालिका गृह कांड मामले का मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर जोकि सेल्टर होम का संरक्षक रह चुका है, वह है। 6 से अधिक लड़कियों ने इस पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। बृजेश ठाकुर बालिका संरक्षण गृह की लड़कियों का यौन शोषण कराता था। वह बड़े अधिकारियों तक लड़कियों को पहुंचाता था। मुजफ्फरपुर और पटना में बृजेश ठाकुर ने अड्डे बना रखे थे, जहां बालिका गृह की लड़कियों को भेजता था। विरोध करने वाली लड़कियों की पिटाई भी करता था।

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इंदु कुमारी मुजफ्फरपुर बालिका गृह की अधीक्षिका थी। वह लड़कियों को डराती-धमकाती थी। उन्हें जबरदस्ती दुष्कर्म करवाने के लिए तैयार करती थी। विरोध करने पर पीटती थी। बालिका गृह में हो रही दरिंदगी में शामिल थी। बृजेश ठाकुर की बड़ी राजदार रही है। मुजफ्फरपुर बालिका गृह की हाउस मदर मीनू लड़कियों को नशे की दवा देती थी। वह विरोध करने वाली बच्चियों को पीटती थी। मुजफ्फरपुर बालिका गृह की काउंसलर मंजू बालिका गृह के दूसरे कर्मचारियों के साथ मिलकर लड़कियों को दुष्कर्म के लिए तैयार करती थी। वह बच्चियों को नशे की दवा खिलाती थी।

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मुजफ्फरपुर शेल्‍टर होम केस को उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद दिल्‍ली ट्रांसफर किया गया था। तब से इस मामले की सुनवाई साकेत कोर्ट में चल रही थी और अब जाकर इसमें फैसला सुनाया गया। अदालत ने इस मामले में 20 मार्च, 2018 को आरोप तय किए थे। अदालत ने 30 मार्च, 2019 को ठाकुर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ बलात्कार और नाबालिगों के यौन शोषण का आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप तय किए थे।अदालत ने बलात्कार, यौन उत्पीड़न, नाबालिगों को नशा देने, आपराधिक धमकी समेत अन्य अपराधों के लिए मुकदमा चलाया था।

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में 40 नाबालिग बच्चियों और लड़कियों से रेप और यौन शोषण होने की बात सामने आई थी। इस मामले में आरोप है कि जिस शेल्टर होम में बच्चियों के साथ रेप हुआ था, वो ब्रजेश ठाकुर का है। इस मामले में ब्रजेश ठाकुर के अलावा शेल्टर होम के कर्मचारी और बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी आरोपी बनाए गए थे। कोर्ट ने 20 मार्च, 2018 को मामले में आरोप तय किए थे। आरोपियों में आठ महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। कोर्ट ने ब्रजेश ठाकुर समेत 21 आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो, रेप, आपराधिक साजिश और अन्य धाराओं के तहत आरोप तय किए थे।

जिस तरह के नियमों की अनदेखी करके बालिका गृह का संचालन बिना रोकटोक चल रहा था और सरकारी फंड भी मिल रहा था, उससे पता चलता है कि मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर की पैठ सियासी गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेसी के कॉरिडोर तक थी। उनकी मदद से वह हर चीज को मैनेज कर लिया करता था। एनजीओ के साथ ही वह कई तरह के अखबार का भी प्रकाशन किया करता था और इसका दफ्तर बालिका गृह के प्रांगण में ही था। इस रिपोर्ट के बाद उसके एनजीओ को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था और इसके बावजूद उसे भिखारियों के लिए आवास बनाने के वास्ते हर महीने एक लाख रुपये का प्रोजेक्ट दिया गया था। हालांकि बाद में इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया था।

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