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अंधविश्वास

ओडिशा में अंधविश्वास के बहाने 6 दलित बुजुर्गों को खिलाया मानव मल और तोड़े आगे के 8 दांत

Prema Negi
5 Oct 2019 8:31 AM GMT
ओडिशा में अंधविश्वास के बहाने 6 दलित बुजुर्गों को खिलाया मानव मल और तोड़े आगे के 8 दांत

कहते हैं जाति नहीं है, सब खत्म हो गयी लेकिन देश के तमाम हिस्सों से उत्पीड़न और अत्याचार की कहानियां होती हैं ​उसमें दलित ही शत-प्रतिशत क्यों होते हैं, क्यों उनके उत्पीड़न की घटना को सामान्य मान लिया जाता है, संसद से लेकर सड़क तक कोई गर्माहट नहीं दिखती है...

जादू-टोने के शक में ग्रामीणों ने बुरी तरह पीटने के बाद पहले 6 बुजुर्गों के दांत तोड़े और फिर जबरन उनके मुंह में टट्टी-पेशाब भर दी। मौत का भय दिखाकर उन्हें लोगों का मल-मूत्र खाने को मजबूर किया गया...

जनज्वार। अंधविश्वास के नाम पर दी जाने वाली नरबलियों और डायन-बिसही के नाम पर किए जाने वाले उत्पीड़न-हत्याओं की खबरें आए दिन मीडिया में छायी रहती हैं। देश के तमाम हिस्सों से ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं।

ब एक ऐसा ही मामला ओडिशा के गंजम जनपद में सामने आया है। यहां जादू-टोना करने के शक में कुछ लोगों ने 6 दलित बुजुर्ग व्यक्तियों के दांत तोड़ दिए और उन्हें मानव मलमूत्र खाने को मजबूर किया। इस मामले में पुलिस ने 29 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह घटना उस दिन सामने आयी जब पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती यानी 2 अक्टूबर को सेलिब्रेट कर रहा था।

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गौरतलब है पिछले लंबे समय से झूठी अफवाहों के चलते देश के अनेक भागों में सैकड़ों लोग मॉब लिंचिंग का शिकार बनाये जा चुके हैं। इन घटनाओं में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। असम, बंगाल, बिहार, झारखंड में ऐसी खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं।

भी हाल ही में जहां ओडिशा में एक गरीब महिला को चुडै़ल कहकर मौत के घाट उतार दिया गया था। बीती 30 जून को झारखंड के पश्चिम सिंघभूम जिले के रोवाओली गांव में जादू-टोने के शक में एक 50 वर्षीय महिला और उसकी 25 साल की बेटी की नृशंसता से उन्हीं के पड़ोसी परिवार ने हत्या कर दी थी।

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ओडिशा के गंजम जिले के गोपारपुर गांव में सामने आई इस घटना में कुछ लोगों को शक था कि 6 दलित बुजुर्ग मिलकर जादू-टोना कर रहे हैं, जिसके चलते उनके इलाके में आधा दर्जन महिलाओं की मौत हो गई है और सात अन्य महिलाएं बीमार हो गईं हैं। जादू-टोने का शक मात्र होने पर ग्रामीणों ने इन 6 बुजुर्गों के साथ मानवता को शर्मसार करने वाला कुकृत्य किया। जब गुस्साई भीड़ इन्हें अपना निशाना बना रही थी तो ये असहाय दलित बुजुर्ग मदद की गुहार लगा रहे थे, दहाड़ें मारकर रो रहे थे, मगर कोई भी इनकी मदद को आगे नहीं आया।

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ग्रामीणों ने बुरी तरह पीटने के बाद पहले इन दलित बुजुर्गों के दांत तोड़े और फिर जबरन उनके मुंह में टट्टी-पेशाब भर दी। मौत का भय दिखाकर उन्हें लोगों का मल-मूत्र खाने को मजबूर किया गया। घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह इन बुजुर्गों को बचाया और गंभीर हालत में उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया। अब बुजुर्गों की हालत स्थित बतायी जा रही है।

जादू-टोने का शक होने पर मॉब लिंचिंग का शिकार बनाये गये 6 दलित बुजुर्गों वाली घटना पर ओडिशा के ​वरिष्ठ पत्रकार शिबशंकर नंद कहते हैं, 'यह घटना बहुत दुखदायक है। इस जमाने में भी जहां हम न्यू इंडिया बनाने की बात कर रहे हैं, वहां अंधविश्वास के कारण इतनी अमानवीयताएं दलितों के साथ हो रही हैं। लोग कहते हैं जातिवाद खत्म हो गया है, लेकिन जातिवाद का इससे बड़ा नमूना और क्या हो सकता है?'

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सपी ब्रजेश राय कहते हैं, मॉब लिंचिंग का शिकार हुए सभी 6 बुजुर्गों के 8-8 दांत भीड़ ने तोड़ दिये थे। हम लोगों ने गांव में पहुंच किसी तरह इन बुजुर्गों की जान बचायी। लिंचिंग का शिकार बने सभी बुजुर्गों की उम्र 60 पार है। पीड़ितों में बुजुर्ग जोगी दास, रामा नाहक, हरी नाहक, सनीया नाहक, जोगेन्द्र नाहक और जुरिआ नहक शामिल हैं।

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कौल एसपी ब्रजेश राय, इस घटना में कथित रूप से शामिल सभी व्यक्तियों के नाम पुलिस के पास हैं, उनके खिलाफ एक्शन लिया जायेगा। जादू-टोने की अफवाह के नाम पर ​बुजुर्गों की लिंचिंग करने वालों में जिन 29 लोगों की गिरफ्तारी की गयी है, उनमें से 22 ​महिलायें हैं। कहा जा रहा है कि लिंचिंग में शामिल अनेक पुरुष गांव से फरार हो गये हैं।

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गातार समाज में बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर ओड़िशा के सामाजिक कार्यकर्ता महेश सायता कहते हैं, जादू-टोना, डायन-बिसही के नाम पर समाज में बढ़ रहीं इस तरह की घटनाओं का मुख्य कारण जागरुकता का अभाव है। हमारे देश में शिक्षा का खराब स्तर भी इसके लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है, अगर हम स्कूली कोर्स में ही बच्चों को जादू-टोने को स्थापित करने वाली तमाम चीजें पढ़ायेंगे तो उनका जाहिर तौर पर इनकी तरफ झुकाव बढ़ेगा और वे पढ़—लिख जाने के बावजूद अंधविश्वासी बने रहेंगे। अगर ऐसी घटनाओं में कमी लानी है तो सबसे पहले हमें अपने स्कूली शिक्षा का स्तर सुधारना होगा।'

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गौरतलब है कि 2016 से अब तक पुरे देशभर में जादू-टोने, डायन-बिसही के नाम पर 134 लोगों को मौत के घाट उतारा गया, जिनमें से सर्वाधिक 123 केस झारखंड के हैं। झारखंड में आये दिन डायन-बिसही के नाम पर विधवाओं, बुजुर्गों, दलितों को लिंचिंग का शिकार बनाया जाता रहा है। ऐसी घटनायें ज्यादातर निम्न तबके में सामने आती हैं।

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